SMART तरीका वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करने के लिए

आप किसी भी तरह का निवेश करे लेकिन सबसे अहम यह होता है कि आप अपने वित्तीय लक्ष्य को हासिल कर ले । लेकिन किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सबसे पहला कदम होता है वित्तीय लक्ष्य को SMART तरीके से तय किया जाए ।

वित्तीय लक्ष्य को स्पष्ट रूप से तय निर्धारित करने से मतलब है कि आप क्या हासिल करना चाहते हैं? उसके लिए आपकी योजना क्या हैं ? कहां निवेश करना है, कितना निवेश करना है और आप उन निवेशों के प्रति आपकी अपेक्षाये सही है।

इसके साथ जब भी हम निवेश के बारे मे सोचते है तो सबसे पहल प्रश्न आता है कि कौन से निवेश के साधन को चुना जाए ? ज्यादातर इस सवाल का जवाब के रूप मे हम वह साधन चुनते है जो ज्यादा रिटर्न दे।

इसीलिए आज हम जानेंगे एक SMART तरीके के बारे में जिससे हम अपने वित्तीय लक्ष्य को निर्धारित कर सकते है :

SPECIFIC – स्पष्ट

व्यक्ति के दिमाग में वित्तीय लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। उदाहरण के लिए, घर खरीदना एक बहुत ही अस्पष्ट लक्ष्य है।

हालांकि, अगर कोई कहता है कि मुझे लखनऊ में एक 2 BHK का घर लेना है। तो इस प्रकार के लक्ष्य, अपने आप में विशिष्ट लक्ष्य होता हैं

क्योंकि कि इन लक्ष्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव हो जाता है और ऐसे लक्ष्यों को प्राप्त करने की अधिक संभावना हो जाती है।

MEASURABLE – जिसे मापा जा सके

लक्ष्य निर्धारित करने के साथ साथ, अगर हमे यह पता हो कि उसको हासिल करने में कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी तो आप उस लक्ष्य को माप सकते है ।

जैसे अपने घर वाले उदाहरण मे , अगर हम यह कहे कि हमें ऐसा घर चाहिए, जिसकी कीमत लगभग 55 लाख रुपये होगी और उस घर के लिए 11 लाख का डाउन पेमेंट देना होगा।

ACHIEVABLE – पूर्ण करने योग्य

वित्तीय लक्ष्य प्राप्त करने योग्य होना चाहिए। कभी-कभी निकट भविष्य में लक्ष्य प्राप्त करने योग्य नहीं होते हैं।

हालाँकि अगर कोई व्यक्ति लक्ष्य प्राप्ति के समय को बढ़ा दे तो उसे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना आसान हो जाता है।

ऐसे लक्ष्य जो कम जोखिम लेने पर भी पूरा होने संभव नहीं होता है परंतु उसके लिए अभी लंबा समय बचा है ।

तो ऐसे लक्ष्यों को अधिक जोखिम और ज्यादा रिटर्न वाले निवेश के साधनो में निवेश करके हम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है ।

उदाहरण के लिए, 1 लाख रुपये के मासिक वेतन और 30,000 रुपये की मासिक बचत वाले व्यक्ति के लिए से 55 लाख का घर लेने का लक्ष्य असंभव प्रतीत होता है। हालाँकि, यदि व्यक्ति थोड़ा अधिक समय लेता है, तो उसका लक्ष्य प्राप्त करने योग्य हो जाता है।

जैसे कि अगर आपको अब से पांच साल के अंत में 11 लाख रुपये का एक कोष जमा करना है और आपको निवेश पर 12 प्रतिशत प्रति वर्ष का रिटर्न मिल सकता है है, तो आपको लगभग Rs. 12,075 रुपये प्रति माह का निवेश करना चाहिए।

REALISTIC- वास्तविक

वित्तीय लक्ष्य यथार्थवादी होना चाहिए। यदि 1 लाख रुपये के मासिक वेतन वाला कोई व्यक्ति लखनऊ के आलीशान इलाकों में एक बहु-मंजिला हवेली बनाने का फैसला करता है.

तो उच्च संपत्ति की कीमतों और अपर्याप्त आय के संदर्भ में यह असंभव प्रतीत होगा।

ऐसी परिस्थितियों में केवल कुछ चमत्कार ही मदद कर सकते हैं।

यही नहीं अगर आप लखनऊ में 2 BHK के घर के साथ साथ अपने महंगी विदेशी छुट्टियों और luxury कार भी लेने की सोचते है ।

TIME BOUND- समय में बंधा हुआ

वित्तीय लक्ष्य को समय के संदर्भ में व्यक्त किया जाना चाहिए। प्रत्येक वित्तीय लक्ष्य एक मूल्य टैग के साथ आता है।

लेकिन मुद्रास्फीति यह सुनिश्चित करती है कि मूल्य टैग शामिल समय के साथ बदलता है।

उदाहरण के लिए, उपरोक्त उदाहरण में यदि हम 5 प्रतिशत पर मुद्रास्फीति मान लें,

तो 55 लाख वाला घर, अब से पांच साल बाद 70.5 लाख रुपये का हो जाता है ।

अगर हमें अपने घर खरीदने वाले लक्ष्य को SMART शब्दों में लिखना है तो उसे कुछ ऐसे लिखा जाएगा :

लखनऊ में 2 BHK घर के लिए 11 लाख रुपये के डाउन पेमेंट की व्यवस्था करना, जिसकी कीमत अब से सात साल बाद 70.5 लाख रुपये है।

वित्तीय लक्ष्य को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने से वित्तीय योजना बनाना आसान हो जाता है।

महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, लक्ष्य और जोखिम क्षमता का मूल्यांकन करें तथा आवश्यकता होने पर योग्य पेशेवर से सलाह लें।

NiveshBytes Editorial Note: वित्तीय नियम, कराधान और उत्पाद संबंधी जानकारी समय के साथ बदल सकती है। महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों की नवीनतम जानकारी अवश्य देखें।

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